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रामायण और महाभारत -”पाठकनामा” आगरा के लिए

पोस्टेड ओन: 21 Aug, 2012 जनरल डब्बा में

हमारे देश की प्राचीन भाषा संस्कृत में लिखे वेद ,पुराण के अलावा रामायण और महाभारत , बाल्मीकी और वेद व्यास ड्वारा लिखे गयेथे आज भी हमारी धरोहर बने हुए हैं. और हमारे लिए ये ग्रन्थ आज भी महत्त्व रखते हैं.हर तरह से ये ग्रन्थ हमारा मार्गदर्शन कर भारतीय संस्कृति और सभ्यता का बखान करते हैं .हर भारतीय इन्हें अपना आदर्श मानता है महाभारत में भले ही भाई भाई की लड़ाई का बखान है फिर भी इन में छोटी- छोटी कथाये आदर्श और अर्थ प्रदान करती हैं.महाभारत की लड़ाई द्रोपती ड्वारा दुर्योधन को ” अंधे का बेटा अँधा ” कहने के कारण ही हूई ,जो की हमारे लिए सन्देश दे जाती है की बोलने से पहले तोलना जरूरी होता है.कहावत है की ‘गोली का दाग मिट जाता है पर बोली का दाग नहीं मिटता’ ,यहाँ यह चरितार्थ होती है.पांडवों में अर्जुन का चरित्र रेखांकित किया जाने वाला है,उनके इसी कारण से भगवान् श्री कृष्णन जी ने अपनी बहिन का ब्याह रचाया था i पांडू पुत्र अर्जुन राजा विराट की पुत्री जो की उसकी शिष्या थी अपनी बेटी मानते हुए उससे शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया उसने राजा विराट से कहा शिष्या तो बेटी होती है क्या बेटी से शादी करना पाप नहीं होगा? यह भी एक शिक्षा ही है. आज हमारा चरित्र इतना गिर गया है की इस शिक्षा को भूल गए हैं, हम कालेज में पढ़ाते पढ़ाते ही शिष्या को ले भागते हैं i अर्जुन के इसी गुणों के कारन श्री कृष्णन को वे भा गए थे और वे उनके मित्रता के पात्र बन गए.इसी तरह धर्मराज युधिष्ठर ने अपनी सचाई के कारन अपना सब कुछ खो दिया और बताया की जीत तो सच की ही होती है.महामंत्री विदुर की नीति आज तक याद रखी जाती है जो की विदुर नीति के नाम से मशहूर है.उनके अनुसार सही होने पर यदि कोई बात अप्रिय लगे तो उसे नहीं कहना चाहीयेशायद सपाट बयानीवाला आदमी आज भी पसंद नहीं किया जाता है!इस तरह महाभारत में कई सन्देश हैं चाहे लड़ाईयों ,चालाबाजीयोंका खजाना ही क्यों न हो?इसी परकार से हमें रामायण में भी तमाम प्रेरणादायक सन्देश व शिक्षाएं मिलाती है जो हमें सुकून और आनद देती हैं

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