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प्रवाचक भी श्रम करते है!----मेरी अमेरीका से आख़िरी पोस्ट!

Posted On: 15 Nov, 2012 Others में

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आजकल हमारे देश में तमाम प्रवचन करने वाले हो गए है! इतनी भीड़ के कारण टी.वी. के दो-तीन चैनल तो सारा दिन इन्ही से भरे रहते है! आप ‘संस्कार’ या ‘आस्था’ चैनल खोलें तो कोई न कोई प्रवचन करने वाला/वाली मिल ही जायेंगे?जायेंगी! और यदि आप धार्मिक विचारों के हैं तो घर बैठ कर ही सारा समय बिता सकते है, कहीं जाने के बिना आप घर बैठे ही अपने भगवान का स्मरण कर लाभ पा सकते है! इनमे तामाम साधु, सन्यासी और योग गुरुओं के नाम आते है! ये सिर्फ प्रवचन के काम ही नहीं करते है अपितु अन्य काम करके भी समाज का लाभ करते है! इनमे स्वामी राम देव दवाईयां बना कर , सतपाल जी, सांसद हो कर, बापू आसाराम भी दवाईंया बना कर,श्री श्री रवि शंकर और तरुण सागर जी अपना प्रकाशन बेचकर समाज को लाभ तो पहुंचा रहे है और तो और समाज की सेवा भी कर रहे है! इस परिश्रम के बदले अगर अपने बेटे की शादी में खूब पैसा खर्च करते है तो क्या हुआ? हर बाप की इच्छा नहीं होती की यदि उसके पास पैसा है तो खर्च करे और पैसा तो खर्च करने के लिए ही होता है! अगर ये लोग सोने और हीरों की घडीयाँ पहनते है और अपने बच्चों को विदेशों मे शिक्षा देने हेतु भेजते है तो उनके उज्जवल भविष्य के लिए जो हर पिता करता है, बाकी इनकी करनी और कथनी में अगर भेद है, तो हम क्यों भूल जाते है की ये पहले मानव है,जिसकी यह कमजोरी होती है! यह उनके परिश्रम का ही तो फल है और इतने बड़े काम में गलती तो होती ही है! और संत विमल जी महाराज ने अपने जीवन में व्यापार करके तमाम नुकसान उठाया,तनाव झेले और तमाम मेहनत के बाद इस मुकाम को हासिल किया तो क्या बुरा किया? इसलिए समाज इनसब संतों का कृतज्ञ है!
आप देखेंगे की इनमे कुछ तो शक्ति है की तमाम लोग इनके प्रति क्यों और कैसे आकर्षित हो कर ,अपना घर बार छोड़ कर नियमित ही इनकी सेवा में रहते है , जो इनके शिष्य कहलवाकर अपने को धन्य मानते हैं! आप यदि इनसे भी अच्छा प्रवचन कर सकने की कला प्राप्त भी कर लें तो भी आप दस लोग इकट्ठा नहीं कर सकते और शिष्य बनाना तो दूर-दूर तक संभव ही नहीं!
इस तरह की कला और फन में माहिरों में बापू आसाराम, स्वामी राम देव, सतपाल जी महाराज,आचार्य सुधांशु जी महाराज, गुरु माँ आनंद मूर्ती,श्री श्री रवि शंकर जी, क्रांतिकारी जैन मुनि तरुण सागर जी महांराज और विमल जी जैसे संतों के नाम मुख्य है! इस तरह इन्होने इस मुकाम पर पहुँचने में पूरा जीवन ही खपा दिया होगा, तब जाकर ये लोग इन ऊंचाईयों पर पहुंच सके हैं ! जिसे हम इनका परिश्रम, साधना,और नियमित अभ्यास कह सकते हैं! जो एक दिन में पा लेना संभव है ही नहीं!
बाकी रही बात इनके असामाजिक कार्यो की उससे हमें क्या लेना-देना? हम केवल इनकी अच्छी -अच्छी बातों को ले और बुरी बातों को नजरंदाज कर दे! उनके वचनों से ५००लोगों में से पांच लोग भी लाभ ले कर अपना जीवन बना लेते है तो इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता! याद रखें की इनकी आज की ऊंचाईयों की नीव में कितनी न टूटी फूटी ईंटें लगी हुई है! जिन्हें देख पाना किसी के बस की बात नहीं! ॐ हरि ॐ!

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 20, 2012

सच में

pitamberthakwani के द्वारा
November 16, 2012

मंजू जी, यह ‘अभिआदी ब्लॉग’ क्या है मुझे मार्गदर्शन दे सके तो आभारी हूँगा! और फिर आपको अपने विचारों से भी अवगत करा सकूंगा! आप को किस बात का डर है की आप नहीं बताती की अमेरीका में कब से और कहाँ है ? क्या आपाको कोई जॉब है? अपना परिचय दे सके तो हम भारतीय काम ही आ सकाते है!

manjusharma के द्वारा
November 16, 2012

sir It is fact that these prvachak have done their best job but about all these i am totally different क्योंकि जो ये वचन जनता या अपने अनुनानियों को सुनाते है इन सबकी apnea jee van शेल्ली और अपने निजी जीवन का रुझान अलग अलग होता है really feel sorry foy माय different opinion but lekhan kalaa so gd highly appreciable M anju Sharma

    pitamberthakwani के द्वारा
    November 16, 2012

    मंजू जी आपकी विचारा धारा का कायल हूँ! आभार!

manjusharma के द्वारा
November 15, 2012

Sir Now a days a am in USA I have written on abhiaadi blog try to read I will also read your article Thanks for your appreciation MANJU SHARMA

    pitamberthakwani के द्वारा
    November 15, 2012

    thanks manju sharmaa ji, u r also in U S A , if so u pl let me know where r u ? it is my hard luck not to see u .now i am going back to india.after 6 months stayed in columbus.


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