सपाटबयानी

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फांसी होने का दरवाजा खोलें!

Posted On: 26 Dec, 2012 Others में

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अभी हाल में हुए गैंग रैप में सुशील कुमार के साथ भले ही चिदंबरम जी ने मोर्चा सम्भाला हो, पर क्या कुछ होने वाला है?, नहीं! यह खेल कभी भी बंद नहीं है होने वाला! देखा जाय तो यह पाप किसी की ह्त्या करने से भी घिनौना और भयावह है! सोचिये की उस लड़की का क्या हाल हो रहा होता होगा ,जिसकेसाथ यह दूश्कर्म हो रहा होता होगा?एक सामान्य आदमी की हालत जब सुनकर ही खराब हो जाती है तो भुक्तभोगी का हाल बयान करना कैसे संभव होगा?इसका इलाज है की संविधान में परिवर्तन कर ऐसे लोगोको फांसी दी जाने का का दरवाजा खोला जाए! फांसी भी मुग़ल कालीन तरीके से —”सार्वजनिक रूप से चौराहे पर जनता के सामने गोलियों से भूना जाए! ताकि दर्शकों के मन में भय पैदा हो सके!’यदि यह तरीका नहीं अपनाया गया तो यह सब चलता ही रहेगा और कोइ भी कुछनही कर पायेगा!

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pitamberthakwani के द्वारा
December 29, 2012

अक्रक्ताले जी,आपको मैं आज भी याद हूँ ,आपको धन्यवाद! आपने मेरे विचारों से सहमति जताई है ,आपका शुक्रिया!

akraktale के द्वारा
December 28, 2012

आदरणीय पीताम्बर जी आपका स्वदेश में स्वागत है. सही कहा है आपने इन मानवता के गुनाहगारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए और उससे भी जरूरी है कि सजा शीघ्र मिलनी चाहिए ताकि जनता के बीच संदेश जाए कि अब खैर नही है.सादर.

jlsingh के द्वारा
December 27, 2012

आदरणीय पीताम्बर जी, सादर अभिवादन! काफी दिनों बाद मंच पर आपकी उपयुक्त पोस्ट के साथ उपस्थित देख मन हर्षित हुआ! अमरीका में क्या प्रावधान है वहां बलात्कार होता भी है या यह सिर्फ भारत की ही अपसंस्कृति है -यह भी बताने की कृपा करें!

    pitamberthakwani के द्वारा
    December 27, 2012

    singh saab namaskaar, main amereekaa se 22.11 02 ko aa gayaa thaa !bharat me aane par yaH PAHALEE POST LIKH RAHAA HOON! aapko dhanywaad de rahaa hoon ki aap mujhe nahee bhool sake ! yahaan vyavasthit hone me samay lagegaa kjaaran ki akelaa hoon sab theek thaak karane ke baad hee kuchh kjar paaungaa!

nishamittal के द्वारा
December 27, 2012

पीताम्बर जी भारत आने पर स्वागत आपका .सहमत हूँ आपके विचारों से.

    pitamberthakwani के द्वारा
    December 27, 2012

    nisha ji, main aa to gyaa thaa ek maah pahale par yah post aaj pahalee hee likhee hai aapake dwaaraa swaagat ke liye aabhaar !

Santlal Karun के द्वारा
December 27, 2012

आदरणीय थक्वानी जी, ठीक कहा आप ने,बलात्कार की सज़ा सिर्फ़ और सिर्फ़ मृत्युदंड होनी चाहिए |

    pitamberthakwani के द्वारा
    December 27, 2012

    karun ji aapake jawaab ke liye dhanyawaad!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 26, 2012

आदरणीय सर जी सादर अभिवादन साथ ही अपनी कुत्सित भावनाओं को भी फांसी दी जाये

    pitamberthakwani के द्वारा
    December 27, 2012

    kushwaah ji aapane meree post padhee, achhaa nahee, bahut achhaa lagaa! abhaar !


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